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18 साल की बेटी को पति के साथ रहने की अनुमति, हाई कोर्ट बोला- मां-बाप की मर्जी नहीं हो सकती हावी

 Written By: Khushbu Rawal
 Published : Sep 10, 2026 12:01 am IST,  Updated : Sep 10, 2026 12:04 am IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में 18 साल की बालिग युवती को अपनी मर्जी से पति के साथ रहने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बालिग व्यक्ति को अपना जीवनसाथी चुनने का अधिकार है, माता-पिता की चिंताएं बालिग की संवैधानिक स्वायत्तता पर हावी नहीं हो सकतीं।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बालिग को जीवनसाथी चुनने का अधिकार है। Image Source : WWW.ALLAHABADHIGHCOURT.IN/ PEXELS

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 18 वर्षीय युवती को अपने पति के साथ रहने की अनुमति देते हुए कहा कि माता पिता की चिंताएं एक वयस्क व्यक्ति को अपना जीवन साथी चुनने की संविधान के तहत मिली स्वतंत्रता से ऊपर नहीं हो सकती। जस्टिस संदीप जैन ने अधिकारियों को युवती और उसके पति की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा कि माता पिता की चिंताएं हालांकि जायज हैं, लेकिन वे एक वयस्क व्यक्ति को संवैधानिक रूप से मिली स्वतंत्रता से ऊपर नहीं हैं। अपना जीवन साथी चुनने का अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सम्मान का पहलू है और राज्य और उसकी संस्थाओं के लिए जरूरी है कि वे ऐसी स्वायत्तता का सम्मान करें।

शादी के बाद लड़की को उसके पिता

सुनवाई के दौरान, युवती के पति की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि वह कानूनी रूप से विवाहित उसके मुवक्किल मोहित की पत्नी है और इनकी शादी इनके माता पिता की इच्छा के विरुद्ध हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि शादी के बाद लड़की को उसके पिता और रिश्तेदारों ने अवैध रूप से रोककर रखा है। उन्होंने बताया कि इस मामले में जब कोई FIR दर्ज नहीं की गई तो लड़की ने खुद भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता की धारा 173(4) के तहत 20 जुलाई, 2026 को बदायूं में सक्षम अदालत के समक्ष शिकायत कर अपने पिता और रिश्तेदारों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया।

युवती के पिता ने क्या कहा?

वहीं दूसरी ओर, युवती के पिता ने इस बात से इनकार किया कि उनकी बेटी ने मोहित से विवाह किया था। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी अपनी इच्छा से अपने माता पिता के घर में रह रही है और उसे अवैध रूप से रोक कर नहीं रखा गया है। राज्य सरकार के वकील ने कहा कि पिता ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई जिसके बाद लड़की को बरामद कर उसे उसके पिता को सौंप दिया गया था।

हाईकोर्ट ने साफ कहा- संवैधानिक स्वतंत्रता सबसे ऊपर

इससे पहले 31 अगस्त को हाईकोर्ट ने दस्तावेजों पर गौर करने के बाद पाया कि लड़की वयस्क हो चुकी है और इसलिए वह अपना जीवन साथी चुनने और अपनी पसंद की जगह पर रहने के लिए स्वतंत्र है। यह पता लगाने के लिए कि क्या वह स्वेच्छा से अपने माता पिता के घर में रह रही है या उसे अवैध रूप से रोककर रखा गया है, कोर्ट ने लड़की को पेश करने का निर्देश दिया था। 7 सितंबर को जब लड़की को अदालत में पेश किया गया तो जस्टिस संदीप जैन ने उसकी उम्र, इच्छा और किन परिस्थितियों में वह रह रही है, इसका पता लगाने के लिए लड़की से बातचीत की।

कोर्ट में लड़की ने क्या बताया?

लड़की ने बताया कि उसकी जन्म तारीख आठ जून, 2008 है और वह बालिग हो चुकी है। लड़की ने बताया कि उसने अपनी इच्छा से 18 जुलाई, 2026 को मोहित से शादी की और वह अपने पति के साथ पत्नी के तौर पर ससुराल में रहने की इच्छुक है। लड़के ने भी शादी की बात स्वीकार की और कहा कि वह पति के तौर पर लड़की के साथ रहना चाहता है। लड़की के पिता ने भी कोर्ट में स्वीकार किया कि उसकी बेटी बालिग हो चुकी है। 

वहीं, एक अन्य मामले में हाल ही में इलाहाबाद हाइकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ''नाबालिग बेटी की कस्टडी पिता को देने से ननिहाल वाले मना नहीं कर सकते।''

(इनपुट- PTI)

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